जिसने अपने ज़मीर को बचाए रक्खा है , समझो उसने अनमोल रतन को बचा के रक्खा है ।
hello my dear friends. mai javed ahmed khan [ javed gorakhpuri ] novelist, song / gazal / scriptwriter. mare is blog me aapka dil se swaagat hai.
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रविवार, 24 जनवरी 2021
अनमोल रतन को बचा के रक्खा है
ज़मीर बेच कर अगर अरबपति नहीं बन पाए तो सैकड़ों और हज़ारों रुपये में उलझने से क्या फ़ायदा , इससे बेहतर है कि अपने ज़मीर को बचाए रक्खो ।
शनिवार, 23 जनवरी 2021
तुम जानते हो अपने अन्दर के झूठ और सच को
तुम जानते हो अपने अन्दर के झूठ और सच को । इस लिए कभी अपनी झूठी शान को "आंन " मत बनाना , क्यों कि झूठ का अपना कोई धरातल नहीं होता , इसे टूटने में ज्यादा वक़्त नहीं लगता , जब झूठी आंन , मान और शान टूटतीं हैं तो कलेजा मुंह को आ जाता है ।
शुक्रवार, 22 जनवरी 2021
ऐसा रिश्क मत लेना कि जिससे तुम्हारा नुकसान हो जाय
मेरे लिए कभी ऐसा रिश्क मत लेना कि जिससे तुम्हारा नुकसान हो जाय , मैं तुम्हारे इस नुकसान वाले रिश्क में शामिल नहीं हो पाऊंगा । तुम्हारे रिश्क से अगर तुम्हारा भला या फायदा हो जाय , तो मैं तुम्हारे इस रिश्क में शामिल हो सकता हूं ।
गुरुवार, 21 जनवरी 2021
मरना कोई नहीं चाहता
पाना तो सभी चाहते हैं ।
खोना कोई नहीं चाहता ।
लेना तो सभी चाहते हैं ।
देना कोई नहीं चाहता ।
जीतना तो सभी चाहते हैं ।
हारना कोई नहीं चाहता ।
जीना तो सभी चाहते हैं ।
मरना कोई नहीं चाहता ।
हक़दार होना तो सभी चाहते हैं ।
हक़ को निभाना कोई नहीं चाहता ।
ये सब , लोगों की चालांकी भरी मान्सिकता सिर्फ है । जब कि किसी के बस में कुछ भी नहीं है । सब कुछ उसके बस में है , जिसने इस दुनियां को बनाया है । वो जिससे जो करवाना चाहता है , करवा लेता है ।
बुधवार, 20 जनवरी 2021
जब हालात नाजुक होते हैं
जब हालात नाजुक होते हैं तो सही और ग़लत का फर्क नज़र नहीं आता । ग़लत अल्फाज़ तो ग़लत होते ही हैं , मगर इस नाजुक हालात में सही अल्फाज़ भी दर्द देते हैं ।
शनिवार, 16 जनवरी 2021
मनगढ़ंत के अर्थों में सारी जिंदगी भटकते रहोगे
जिस कालेज के तुम स्टुडेंट हो , उस कालेज में , मैं प्रोफेसर हूं । एक वाक्य के बहुत सारे अर्थ निकलते हैं । निर्अर्थक एवं मनगढ़ंत के अर्थों में सारी जिंदगी भटकते रहोगे , सही अर्थ जानने के लिए मेरे क्लास में तो आना ही पड़ेगा ।
रविवार, 10 जनवरी 2021
अर्निंग के प्लेटफार्म भी मिल जाएंगे
मोबाइल पर न्यूज़ पढ़ते समय , यूट्यूब पर वीडियो या कोई न्यूज़ देखते समय बीच - बीच में एडवरटाइजिंग शुरु हो जाता है । इसी तरह टेलीविजन पर भी हर प्रोग्राम में एडवरटाइजिंग , फिल्म हो , सीरियल हो या न्युज चैनल बीच में एडवरटाइजिंग प्रस्तुत कर के बना बनाया मूड ख़राब कर देता है । क्या ऐसा नहीं हो सकता कि सारे एडवरटाइजिंग को पहले या बाद में दिखाया जाय ।
बीच - बीच में प्रचार को सैतनहट या भ्रमित करना कहा जा सकता है । इस तरह से भ्रमित करने के लिए लोग पैसा देते हैं । अखबार में प्रचार छापने पर अखबार वाले को पैसा मिलता है । टेलीविजन पर जीस चीज़ में प्रचार दिखाया जाता है उनको पैसा मिलता है । यूट्यूब पर जिसके चैनल पर प्रचार दिखाया जाता है , उनको भी पैसा दिया जाता है ।जिसके ब्लॉग पर प्रचार दिखाया जाता है , उनको भी पैसा दिया जाता है । क्या बिना प्रचार के उनकी इनकम नहीं हो सकती ? जब की कोर्ट में , मीटिंग्स में , और भी बहुत सारे प्रोफेशनल कामों में मोबाइल को भी स्वीच ऑफ करा दिया जाता है , कि किसी प्रकार का बाधा न पड़े तो फिर उपरोक्त लोगों को क्यों नहीं समझ में आता है कि हमारे दर्शक भी बाधित होते होंगे । क्या ऐसा नहीं हो सकता है कि मोबाइल पर एडवरटाइजिंग का एक एप लांच हो जाए जिससे लोग उस पर एडवरटाइजमेंट दे सकें और जो एडवरटाइजमेंट को देखेगा उसे पैसा दिया जायेगा तो कैसा रहेगा ? । टेलीविजन पर एडवरटाइजिंग का चैनल बन जाय जो देखेगा उसे बैलेंस दिया जाएगा जिससे वे अपने टेलीविजन के मनपसंद चैनल्स को रिचार्ज कर सकें , तो कांटीन्यू किसी भी चीज़ को पढ़ा और देखा जा सकता है और लोगों को अर्निंग के प्लेटफार्म भी मिल जाएंगे ।
शनिवार, 9 जनवरी 2021
परिस्थितियों पर किसी का वश नहीं चलता
परिस्थितियों पर किसी का वश नहीं चलता , बुद्धिमानी इसी में है कि परिस्थितियों के अनुसार अपने आप को ढाल लिया जाए ।
बुधवार, 6 जनवरी 2021
मनोमस्तिस्क को विचलित कर देने वाली एक मानसिकता
इस दौर में , मनोमस्तिस्क को विचलित कर देने वाली , एक मानसिकता को मैं देख रहा हूं , कि लोग लोगों की जरूरतों को , मजबूरियों को , चाहतों को और सपनों को जानना चाहते हैं । इस को जानने के लिए बहुत क्लोज भी होना पड़े तो भी हो जाएंगे , ऐसा हर कार्य करेंगे जिससे आप को यह पूरी तरह से एहसास हो जाय कि इनसे बड़ा हमदर्द दूसरा हमारे लिए अब कोई और नहीं है । किसी के मन में क्या है । दिमाग में क्या चल रहा है । इस को जानने का कोई और आसान रास्ता नहीं है । इस लिए इसमें अगर कुछ वक़्त भी बर्बाद करना पड़े तो भी लोग अपना समय निकाल कर वक़्त देते हैं । जानकारी ले लेने के बाद खामोशी साध लेते हैं । कभी कभी दूरी भी बना लेते हैं , मगर दूर रहते हुए भी किसी न किसी माध्यम से आप के गतिविधियों की जानकारी रखते हैं ।
यह दूरी कोई कारण दिखा कर तुरंत भी बनती है , और धीरे-धीरे भी बनती है । धीरे धीरे जो बनती है , उसमें तमाम कामों के झाम बताए जाते हैं । कभी कभी तो भावनात्मक बातों को भी कहा जाता है , कि अब ऐसे तो काम चलेगा नहीं आप के लिए ही मैं प्रयास कर रहा हूं । जिससे आप को ये लगे की हम दोनों के लक्ष्य एक ही हैं । इन बातों को सुनकर खुद को महसूस होता है, कि चलो कोई बात नहीं है । मैं तो अभी व्यस्थ हूं , या मजबूर हूं , लेकिन ये तो लगा हुआ है ।
यह एक झांसा है । सच्चाई तो ये है कि वो अपना काम कर रहा है । अगर कहीं से कोई सोर्स आप का बन गया और आप ने अपने सपने को साकार कर लिया तो वो आप को ढूंढता हुआ आ जाएगा और ऐसा चिपकेगा कि जैसे पहले आप के दिल में घुसा था और सबसे बड़ा हमदर्द बन कर आप के दिलो-दिमाग पर राज किया था । और फिर यह कह कर दूरी बनाना शुरू कर दिया था , कि हम-दोनों के लक्ष्य तो एक ही हैं आप के पास समय नहीं है , या पैसा नहीं है तो क्या हुआ मैं आप के ही लक्ष्य को पाने का प्रयास कर रहा हूं जिसमें हम दोनों की भलाई है ।
अब वह अपने लक्ष्य को आप के द्वारा ही पूरा करेगा चाहे आप बर्बाद हो कर रोड पर क्यों न आ जाए इससे उसको कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है ।
अगर आप वहीं पड़े हैं । जहां थे तो सारी जिंदगी वहीं पड़े रहेंगे । परिवर्तित होते समय के अनुसार यदि ऐसा ही चांस उसको मिल गया और उसने अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लिया तो लौट कर फिर वो आप से मिलने नहीं आएगा , अगर अचानक कहीं मुलाकात हो गई , तो फिर मिलेंगे के साथ निकल लेगा और अगर समय रहा तो आप से वही बात करेगा जिससे यह झलक आएगी कि वो काफी परेशान है । आप चाह कर भी कुछ नहीं कह सकते ।
अगर आप से कोई काम लेना है , या आप के माध्यम से उसका कोई काम हो सकता है , तो आप को पहली मुलाकात में ऐसा कुछ नहीं बताएगा कि जिससे यह लगे कि अपनी जरूरत पड़ने पर आया है ।
आप से बहुत सारी बातों को करने के बाद आप के सपनों को , आप के जरुरतों को और आप के चाहतों को पुरा करने के लिए आप के सहयोग की बात करेगा जिससे लगेगा कि अब हम दोनों लोगों को साथ ही कम करना है ।
लेकिन ऐसा नहीं होगा वह आप के भावनाओं से खिलवाड़ करने आया है , अगर आप समझ गए तब भी दुखी होंगे और अगर नहीं समझे तो आप के सहयोग को लेकर अपना काम निकाल लेगा फिर अपना रास्ता पकड़ लेगा तब तो दुःखी होंगे न आप ।
अपने अंतर्मन की जिन चीजों को आप ने उससे शेयर किया था , वो आप की नीजी भावनाएं हैं । कभी कभी ऐसा भी होता है कि आप की नीजी भावनाओं को बिना आप से मिले , बिना आप के संपर्क में आए , बिना आप के क्लोज हुए भी जो लोग जान लेते हैं वे लोग भी आप से मिल सकते हैं , और ऐसे लोग जब मिलते हैं , तो वे डायरेक्ट आप की सारी बातों को अपने विचार के रूप में पेश करता है । ऐसे में आप को एहसास होता है , कि हम दोनों के विचार तो एक ही हैं । इस परिस्थिति में आप को उसके साथ जुड़ने में कोई दिक्कत नहीं महसूस होती , लेकिन चाहे ये व्यक्ति हो या वो
दोनों आप के भावनाओं की बुनियाद पर ही खड़े हो कर , आप की भावनाओं से आप को ब्लैक मेल करेंगे , आप को कैश करेंगे , और आप की भावनाओं से खिलवाड़ करेंगे ।
बाद में आप सब कुछ समझ कर भी कुछ नहीं कर सकते ।
बेहतर होगा कि आप अपनी इच्छाओं को और उन तमाम चीजों को जो आप की अपनी नीजी सिक्रेसी है , उसे अपने अंतर्मन में ही रक्खें । अचानक पहली मुलाकात में ही अगर दो लोगों के विचार आपस में मिलते जुलते हैं , तो यह आश्चर्य जनक नहीं है । आश्चर्य जनक तो तब हो जाता है कि जब बिना सोचे ही विचार मिलते ही तुरंत भावनात्मक ( इम्मोशनली ) जुड़ जाना । यहां आप को थोड़ा समय खुद में विचार करने के लिए निकालना आवश्यक है । ये वो मुकाम है । जहां आप के फैसले ही आप के आबादी और बर्बादी के जिम्मेदार होंगे । किसी की भावनाओं से खिलवाड़ करना जिस्म से प्राण निकाल कर बेज़ान मुर्ती में परिवर्तित कर देने के बराबर होता है । जिसे मैं सिर्फ पाप ही नहीं बल्कि महा पाप समझता हूं । मेरा सुझाव - वादा तो किसी से कभी करो ही मत अगर करते हो तो वादे को नहीं बल्कि वादे की मर्यादा को तो बचाए रक्खो ।
मंगलवार, 5 जनवरी 2021
जब समझ में नहीं आता तो बेबुनियाद लगता है
दुनियां में कोई भी सवाल बेबुनियाद नहीं होता । बस सवाल करने वाले का मकसद और उसका सवाल , जब समझ में नहीं आता , तो बेबुनियाद लगता है ।
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