Translate

रविवार, 7 फ़रवरी 2021

प्रेस रिपोर्टर / सोशल मीडिया रिपोर्टर

प्रेस रिपोर्टर दैनिक अखबार के भी हैं । साप्ताहिक अखबार के भी हैं । महीने में एक बार निकलने वाले अखबार के भी हैं । इनको प्रेस से मिलता क्या है ?
मुझे लगता है यह बताने की जरूरत नहीं है । इनके संघर्ष को भी आप लोग देखते और जानते हैं ।
कभी कभी जान भी चली जाती है । कैमरे तोड़ दिये जाते हैं । मार भी खानी पड़ जाती है । यह काम पुरी इमानदारी से किया जाय तो बहुत जोखिम भरा भी है और जोखिम उठाना भी पड़ता है ।
जीवन में बहुत ज्यादा संघर्ष करने के बाद अगर सुरक्षित रहे और अगर मान्यता प्राप्त हो गई तो कुछ सुविधाएं मिल जाती हैं वर्ना कमाने के लिए तो किसी का होना ही पड़ता है । और आज रिपोर्टरस की क्या छवि है ? किस नजरिए से देखे जाते हैं , यह सभी को पता है ।
खैर एक रिपोर्टर और है जिसे सोशल मीडिया पर लोग देखते हैं ।
इन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं पड़ती है । इनका कैमरा भी नहीं टूटता , मार भी नहीं पड़ती , न तो जोखिम ही उठाना पड़ता है । अपने बेडरूम में ही पड़े पड़े नेट से सारीे रिपोर्ट निकाल लेते हैं और अपने यूट्यूब चैनल पर प्रसारित कर देते हैं ।
ऐसा लगता है , कि इनसे ज्यादा मेहनत कोई करता ही नहीं , इनसे ज्यादा जोखिम कोई उठाता ही नहीं ।
अपने न्यूज़ को क्लिक और बूम कराने के लिए बे वजह के अनाप-शनाप टाईटल भी डाल देते हैं ।
ऐसे में इनके चैनल के न्यूज़ क्लिक भी होते हैं और बूम भी कर जाते हैं , जिससे अच्छी कमाई भी होना शुरू हो जाती है । ये लोग फिल्ड वर्कर नहीं हैं और न तो फिल्ड का कोई अनुभव होता है ये लोग सिर्फ कांपी पेस्टर हैं ।
न्यूज़ को कांपी कर के पेस्ट कर देना और ज्यादा कुछ करेंगे तो आवाज़ भी डाल देंगे , ऐसे लोग भ्रमित भी करते हैं ।
भारत में बढ़ते एंड्रॉयड , स्मार्टफोन एक अलग ट्रैंड पकड़ता जा रहा है । हर वर्ग हर आयु के लोगों की आवश्यकता बनती जा रही है , जिसमें कुछ न कुछ तो लोगों को देखना ही है । इसी में क्रियेटर्स भी हैं और वीवर्स भी ।
अखबार के रिपोर्टर की छवि जैसे दिन ब दिन गिरती जा रही है उसी तरह सोशल मीडिया के रिपोर्टर की भी चालाकियां लोगों की समझ में आती जा रहीं हैं । ऐसा नहीं है कि बाग के बाग ही कोपलासी हो गये हों , कुछ पत्रकार आज़ भी हैं जो अपने वसूलों से समझौता नहीं करते , वैसे ही कुछ सोशल मीडिया पर न्युज चैनल भी हैं , जो बंद भले हों जाय मगर कांपी पेस्ट नहीं कर सकते और न तो फेंक हेडिंग डालते हैं ।

बुधवार, 3 फ़रवरी 2021

जब कोई निगाह से दूर होता है

जब कोई निगाह से दूर होता है तो फोन पर बहुत सारी बातें करना आ जाता है । इतनी बातें होने लगततीं हैं कि रखने का मन नहीं होता भले ही बैट्री बैठने लगे या नेटवर्क छोड़ने लगे या आवाज़ फंसने लगे लेकिन बात नहीं खतम होती ।
जब सामने आ जाते हैं तो बोलती बंद हो जाती है कोई बात नहीं रहती और न ज्यादा आवाज़ निकलती है ।
फोंन पर तो डाटा कटता है और वाइस चार्जेस भी लगाते हैं । लेकिन आमने-सामने होने पर कोई चार्जेस नहीं लगते फुर्सत भी रहती है और फ्री की बातें भी मगर बहुत कम लोग ही इसका लाभ लेते हैं । फोंन पर बातें करना लोगों की आदत सी बन गयी है ।

रविवार, 31 जनवरी 2021

भागना या मुंह मोड़ लेना

भागना या मुंह मोड़ लेना किसी समस्या का समाधान या हल नहीं है । ठहर जाना , डट जाना , रुक जाना ही समस्या के समाधान का हल ढूंढने पर मजबूर हो जाना होता है , या   समाधान कराने पर मजबूर कर देने के बराबर होता है ।

शनिवार, 30 जनवरी 2021

दुनियां में रहें या दुनियां से चले जाएं

मैं किसी को अपने वश में जादू , मंतर से नहीं करता ।
मैं किसी को अपने वश में टोटका , जंतर से नहीं करता ।
मैं किसी को अपने वश में गुंडा गर्दी से नहीं करता ।
मैं किसी को अपने वश में अपने प्रभाव या दबाव से नहीं करता । मैं किसी को अपने वश में रत्न या ताबीज पहन कर नहीं करता । मैं किसी को अपने वश में हिप्नोटिज्म के माध्यम से नहीं करता । क्यों की ये सारे माध्यम स्थाई नहीं होते , इनकी एक समय सीमा होती है । जब वो समय सीमा समाप्त होती है तो सब कुछ उल्टा हो जाता है । जो व्यक्ति वश में किया गया था , वही व्यक्ति दुश्मन भी बन जाता है । इस लिए उपरोक्त माध्यमों का सहारा कभी भी न लें ।
मैं उपरोक्त माध्यमों से सहारा लेकर किसी को वश में नहीं करता । मैं लोगों को अपने अच्छे व्यवहार और दिल की मुहब्बत से लोगों को वश में करता हूं । क्यों की यही स्थाई है । यही सत्य है । यही कायम रहेगा । आप दुनियां में रहें या दुनियां से चले जाएं । आप की मुहब्बत और अच्छे व्यवहार हमेशा क़ायम रहेंगे ।

शुक्रवार, 29 जनवरी 2021

आविष्कार पुरा हो जाने के बाद

क्या करुं मैं भी तो उसी को ढूंढ रहा हूं , जिसे आप भी ढूंढ रहे हैं । अचरज भरी और आस्चर्यजनक चीज़ों को , जिसे पढ़ने , सुनने और देखने के बाद सोचने पर मजबूर कर दे ।
अनसुनी , अनकही और अनदेखी चीजों की तलाश में तो आज भी मैं हूं । आप सोचते होंगे कि यह संभव नहीं है । मुझे पुर्ण विश्वास है , कि यह असंभव भी नहीं है । संभावनाएं तो वहां तक हैं , जहां तक आप सोंच सकते हैं । असंभव तो बस वही है , जिसे आप कभी सोंच नहीं सकते ।
जितने भी आविष्कार हैं , वो सब किसी की सोंच ही तो हैं ।
भले ही सुरुआत में लोगों को पागलपन लगा हो । आविष्कार पुरा हो जाने के बाद उपयोगकर्ता तो आज सभी लोग हैं ।
कोई अगर कुछ सोचता है और उसपर काम करता है , तो उसे व्यर्थ का पागलपन न समझें , अगर आप से उसके हक़ में कोई सहयोग नहीं हो सकता है , तो उसे निराश भी न करें  कोई ऐसी बात न कहें जिससे वो निराश हो या आप खुद उसकी नज़रों में बेवकूफ नज़र आने लगें ।
उसका पागलपन उसके लक्ष्य तक एक दिन जरूर ले जाएगा । इतना जरूर कहूंगा कि किसी पर ग़लत कमेंट करने से बेहतर है कि उसको प्रोत्साहन दें ताकि उसके जेहन में आप की अच्छी तस्वीर बनी रहे ।

रविवार, 24 जनवरी 2021

अनमोल रतन को बचा के रक्खा है

ज़मीर बेच कर अगर अरबपति नहीं बन पाए तो सैकड़ों और हज़ारों रुपये में उलझने से क्या फ़ायदा , इससे बेहतर है कि अपने ज़मीर को बचाए रक्खो ।
जिसने अपने ज़मीर को बचाए रक्खा है , समझो उसने अनमोल रतन को बचा के रक्खा है ।

शनिवार, 23 जनवरी 2021

तुम जानते हो अपने अन्दर के झूठ और सच को

तुम जानते हो अपने अन्दर के झूठ और सच को । इस लिए कभी अपनी झूठी शान को "आंन " मत बनाना , क्यों कि झूठ का अपना कोई धरातल नहीं होता , इसे टूटने में ज्यादा वक़्त नहीं लगता , जब झूठी आंन , मान और शान टूटतीं हैं तो कलेजा मुंह को आ जाता है ।

शुक्रवार, 22 जनवरी 2021

ऐसा रिश्क मत लेना कि जिससे तुम्हारा नुकसान हो जाय

मेरे लिए कभी ऐसा रिश्क मत लेना कि जिससे तुम्हारा नुकसान हो जाय , मैं तुम्हारे इस नुकसान वाले रिश्क में शामिल नहीं हो पाऊंगा । तुम्हारे रिश्क से अगर तुम्हारा भला या फायदा हो जाय , तो मैं तुम्हारे इस रिश्क में शामिल हो सकता हूं ।

गुरुवार, 21 जनवरी 2021

मरना कोई नहीं चाहता

पाना तो सभी चाहते हैं ।
खोना कोई नहीं चाहता ।

लेना तो सभी चाहते हैं ।
देना कोई नहीं चाहता ।

जीतना तो सभी चाहते हैं ।
हारना कोई नहीं चाहता ।

जीना तो सभी चाहते हैं ।
मरना कोई नहीं चाहता ।

हक़दार होना तो सभी चाहते हैं ।
हक़ को निभाना कोई नहीं चाहता ।

ये सब , लोगों की चालांकी भरी मान्सिकता सिर्फ है । जब कि किसी के बस में कुछ भी नहीं है । सब कुछ उसके बस में है , जिसने इस दुनियां को बनाया है । वो जिससे जो करवाना चाहता है , करवा लेता है ।

बुधवार, 20 जनवरी 2021

जब हालात नाजुक होते हैं

जब हालात नाजुक होते हैं तो सही और ग़लत का फर्क नज़र नहीं आता । ग़लत अल्फाज़ तो ग़लत होते ही हैं , मगर इस नाजुक हालात में सही अल्फाज़ भी दर्द देते हैं ।