जन्म से पहले हम जहाँ होते हैं वहां
आनन्द ही आनन्द है कितना आनन्द है
इसकी कोई व्याख्या नहीं की जा सकती।
अगर आप इस आनन्द की कल्पना करना चाहते हैं
तो आप के कल्पनाओं की आखरी सीमा उस कल्पना
के - 0 % तक ही हो सकती है।
जन्म लेने के बाद हम जहाँ होते हैं वहां दुख के सिवा
कुछ भी नहीं है। यहां सुख पाने के लिए किसी न किसी
को दुख देना ही पड़ेगा।
hello my dear friends. mai javed ahmed khan [ javed gorakhpuri ] novelist, song / gazal / scriptwriter. mare is blog me aapka dil se swaagat hai.
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रविवार, 1 दिसंबर 2019
जन्म से पहले
मार दिया
अपनो ने दुत्कार दिया ।
गैरों ने ही प्यार दिया ।।
अंधेरे में जब डूबा था ।
उजाला मेरा यार दिया ।।
बे माकसद बे मायने थे ।
खुद से ही अनजाने थे ।।
जीवन कैसे जीना है ।
उसने ही तो सार दिया ।।
लाखों चेहरे लाखों लोग ।
लाखों व्यंजन लाखों भोग ।।
कितना दर्द दिया है जावेद ।
यार को अपने मार दिया ।।
चौक की रंगीनियां
मां हीरो से कहती है,,,,,, ।
मेरी बेटी सोना है सोना और तुम,,,,,,,,,, ।
इस बात पर हीरो गुस्से में बोल पड़ा,,, ।
तो ले जाओ अपनी बेटी को उस बाजार में ,
जहाँ तुमको इसके मुनासिब दाम मिल सकें ,
चौक की रंगीनियां तुम और तुम्हारी बेटी का
इंतजार कर रहीं हैं।
खांकी
तुम्हें तुम्हारी खांकी समेत ऐसी खाक में मिलाऊंगा
कि तुम्हारे अपनों को तुम्हारी राख तक नसीब नहीं होगी ।
बहुत उपर
अब न तो मुझे कुछ पाने की चाहत है और
न ही कुछ खोने का डर क्यों कि मैं अब इन दिनों से
आज़ाद हो कर बहुत उपर उठ चुका हूँ ।
तुम्हारे पास
पाने के लिए कोई वक़्त फ़िक्स नहीं है, मगर
खोने के लिए तुम्हारे पास कुछ भी नहीं है।
शनिवार, 30 नवंबर 2019
औकात
जब वक़्त खराब होता है तो
वो भी बोल कर निकल जाता है
जिसकी कभी कोई औकात नहीं होती।
शुक्रवार, 29 नवंबर 2019
बुद्धिजीवी
लोग बहुत ही बुद्धिजीवी हो गये हैं।
बिना मांगे ही लोगों को सुझाव देने लगते हैं।
मगर खुद कि समस्याओं को नहीं सुलझा
सकते।
गुरुवार, 28 नवंबर 2019
समस्या
आप जिसे समस्या समझ रहे हैं वो वास्तव में समस्या
नहीं है वो सिर्फ और सिर्फ आप के समझ के बाहर है।
जिस वक़्त आप ठंडे दिमाग से समस्याओं को समझने
और सुल्झाने बैठेंगे तो सारी गुत्थी अपने आप सुलझ
कर सामने आना शुरू हो जाती हैं।
इसके बाद भी अगर आप को कुछ नहीं समझ में आ
रहा हो तो उसे चुने जो आप के सबसे करीब हो।
मगर उसके अंदर इमानदारी, शराफत, और गंभीरता
भी होनी चाहिए। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह
बूढा है या नौजवान ।
बुधवार, 27 नवंबर 2019
मजबुरियां
कुछ तो मजबुरियां रही होंगी ।
यू ही कोई बेवफ़ा नहीं होता ।।
वक्त हालात को बदलते हैं ।
आदमी खुद खफा नहीं होता ।।