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बुधवार, 3 सितंबर 2025

आत्मा और शरीर

जो कभी मर नहीं सकती ,
वो तुम्हारे पास है ।
जिसको मरने से कोई रोक नहीं सकता ,
वो भी तुम्हारे पास है ।

अफसोस इस बात का है कि ,
मर जाने वाली चीजों कि चिंता में 
तुम खुद ही मरे जा रहे हो ।

और " वो "

जो कभी मरेगी ही नहीं ।
उसमें न तो तुम्हारी कोई दिलचस्बी है ।
और ना ही तुम्हारा कोई नाता है ।
                         " जावेद गोरखपुरी "

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