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शनिवार, 13 सितंबर 2025

रईश और ज़मीदार

रईश और जमींदार -
खेती , बारी , दौलत और पुराने हवेली नुमा 
मकान से ही सिर्फ नहीं होते हैं ।

रईश और जमींदार का 
दिल , दिमाग़ , विचार , बातें और जेहन भी 
रईश और जमींदार होता है ।

इनका अगर सब कुछ लुट जाए तो भी 
दिल , दिमाग़ , विचार , बातें और ज़ेहन ,
मरते दम तक साथ रहता है ।

दौलत के घमंड में कभी 
रईश और जमींदार ,
बनने की कोशिश मत करना ।

रईश और जमींदार लोग ,
किसी के भी घर की ।
आधी रोटी खाकर या 
एक गिलास पानी पी कर या 
उठने , बैठने का तहज़ीब देख कर या 
मुंह से निकले हुए एक लाईन को सुन कर ,
यह अंदाजा लगा लेते हैं कि 
सामने वाले की औकात क्या है ।
                               " जावेद गोरखपुरी "


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