इतने भी खाली मत रहो कि कोई भी , कभी भी , कहीं भी मिल ले । बिना किसी काम के अपने साथ साथ आप का भी पुरा दिन बे मक़सद नष्ट कर दे ऐसे में न आप कुछ कर सकें न कही जा सके और न कुछ सोच सके इस से बेहतर है कि खुद को इतना व्यस्त कर दो कि अगर कोई मिलना भी चाहे तो आप अपने आप से पूछे कि मैं फुर्सत में कब हो पाऊंगा ।
hello my dear friends. mai javed ahmed khan [ javed gorakhpuri ] novelist, song / gazal / scriptwriter. mare is blog me aapka dil se swaagat hai.
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शुक्रवार, 11 सितंबर 2020
गुरुवार, 10 सितंबर 2020
रिवाज
कभी भी मिलिये किसी से मिलिये या आप फोन पर ही बात कर रहे हों तो लोग इस बात को पुछना नहीं भुलते कि क्या हाल है सब कुछ ठीक है न ।
अगले व्यक्ति को ये जवाब देना पड़ता है कि हां सब ठीक है बल्कि सच्चाई तो ये है कि कुछ भी ठीक नहीं है हर इंसान अपने आप में ही उलझा हुआ है और वह इस कोरोना जैसी महामारी के बाद अपनी नये तरीके से ज़िन्दगी को चलाने और जीने के लिए संभावनाओं को तलाशने में लगा हुआ है । सब कुछ ठीक है कह देना तो लोगों का एक तकिया कलाम यानी की फारमेल्टी, रिवाज, या परंपरा कह सकते हैं कि बन चुका है ।
बुधवार, 9 सितंबर 2020
दिल और दिमाग
दिल और दिमाग दोनों गतिशील होते हैं ।
वक़्त और हालात के मुताबिक आहिस्ता आहिस्ता ठहराव आता है । समझदार और एहसासमंद लोगों को कुछ ज्यादा ही भटकना पडता है । कुछ लोग ऐसे भी मिलते हैं जो बुढ़ापे की ओर कदम बढा चुके होते हैं मगर आदत और हरकतें बचपने की ही होती हैं ।
मंगलवार, 8 सितंबर 2020
खूंन
अच्छाई के लिए बहाया गया या बुराई के लिए बहाया गया अपने लिए बहाया गया या अपनों के लिए बहाया गया ।
देश के लिए बहाया गया या देश के नेताओं के लिए बहाया गया । पैसे के लिए बहाया गया या रुतबे के लिए बहाया गया । रिश्तों के लिए बहाया गया या औलाद के लिए बहाया गया। खूंन और पसीना जिसके लिए बहाया जाता है उसको इसकी कीमत का एहसास नहीं होता लेकिन जो बहाता है वो जानता है कि खूंन और पसीना बहा कर क्या खोया है और क्या पाया है ।
रविवार, 6 सितंबर 2020
सफर
कभी कभी मंजिल के बहुत करीब हो कर भी मिनट भर में सब कुछ बिखर जाता है हम वहीं पहुँच जाते हैं जहाँ से हमने सफर को शुरु किया था ।
शनिवार, 5 सितंबर 2020
अन्त
किसी भी चीज के सुरुआत का रास्ता तो सभी ढूँढ लेते हैं
मगर उसके अंत के बारे में कोई नहीं जानता ।
सोमवार, 31 अगस्त 2020
संकेत
एक सपना है जो जागने नहीं देता ।
एक सपना है जो सोने नहीं देता ।
इस बात को तो बहुत सारे लोग जानते हैं ।
लेकिन एक सपना ऐसा भी होता है जब दर्दनाक चीख के साथ आदमी उठ कर बैठ जाता है ।
कभी कभी तो आदमी इतना डरा हुवा होता है कि रोने भी लगता है ।
अब इसमें कौन से अर्थ निकाले जाएं , जागने न देने वाले
या सोने न देने वाले । जब की यही सपना है जो भूत ,
भविष्य और वर्तमान तीनों से संबंध रखता है जिसमें जीवन की सार्थकता और कुछ संकेत छुपे होते हैं ।
बुधवार, 26 अगस्त 2020
आत्महत्या
आत्महत्या मुझे नहीं मालुम कि लोग क्यूँ करते हैं ।
मेरे विचार से क्रोध की आखरी सीमा भी हो सकती है ।
जीने के लिए जब कोई वजह ही न रह जाय तब भी हो सकती है । विचारवान न होना भी हो सकता है ।
कल्पनाशील न होना भी हो सकता है । सामाजिक प्रतिष्ठा के हनन होने के कारण भी हो सकता है ।
जीवन में कभी कभी ऐसे वक़्त भी आते हैं जब आगे भी मौत पीछे भी मौत दायें भी मौत और बाएं भी मौत यानी कि दूर दूर तक हर तरफ सिर्फ मौत ही आखरी रास्ता हो और मौत के सिवा कुछ भी नहीं तब भी हो सकती है ।
कुछ ऐसी बातें, कुछ ऐसे कारनामें , कुछ ऐसे राज जिससे कानूनन मौत की सजा हो सकती है इस लिए भी आत्महत्या हो सकती है ।
ऊपर बताए गये कारणों के अलावा भी बहुत सारे कारण होते हैं लेकिन पता नहीं क्यूँ मुझे ऐसा लगता है कि वास्तविक आत्महत्या पांच परसेंट ही होती है ।
पंचानबे परसेंट हत्या को आत्महत्या का रुप देने की कोशिश की जाती है जिसमें रियल्टी से भरे हुए नाटक और सबूतों का न होना अस्सी परसेंट लोगों को कामयाब बना देती है ।
रविवार, 23 अगस्त 2020
अनपढ
मुर्ख और अनपढ में फर्क होता है ।
मुर्ख सही और गलत के फर्क को नहीं समझ पाता ।
अनपढ सिर्फ पढना लिखना नहीं जानता सूझ बूझ
और चालाकी के मामले में पढे लिखे लोगों को भी
चुना लगा देता है ।
शनिवार, 22 अगस्त 2020
रिश्ता
सब्र और विश्वास का नाम है रिश्ता ।
कोई भी रिश्ता शर्तों पर नहीं निभाए जाते ।
संबंधों में शर्तें हो सकती हैं मगर रिस्तों में नहीं ।
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