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शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

कफ़न घसोट शायद ऐसे ही होते हैं

मेरी एक बाग है । एक दिन मेरे एक मित्र ने बाग को देखने और घूमने की इच्छा जताई , मैने कहा ठीक है सुबह में आइए तो चलें दो चार घंटे वही बैठेंगे ।
गर्मी का महीना था , भयंकर गर्मी पड़ रही थी । सुबह आठ बजे के बाद से ही धूप की किरण इतनी तेज लगती थी कि जैसे जिस्म में ही हल जाएगी । ऊपर से कोरोना काल , हर तरफ पुलिसकर्मी घूम रहे थे । जो भी घर से बाहर सड़क पर नजर आ जाता था । तो ऐसी पिटाई करते थे कि जैसे मर्डर का मुजरिम मिल गया हो । खैर मैने बाग में चारपाई और कुर्सी भेजवा दी थी । कुछ देर बाद मित्र महोदय अपने एक साथी के साथ आए । हम लोग बाग की ओर चल पड़े बाग में पहुंचे तो मित्र के साथी तुरन्त चारपाई पर लंबे हो गये हम दोनों लोग कुर्सी पर बैठे बात कर रहे थे । उस वक़्त काफी चर्चित टापिक कोरोना ही था । बातों के दर्मियांन ही मेरी नजर बाग के बाऊंडरी पर पड़ी जो सागौन के पेड़ की कतार से बनाई गयी थी । लकड़ी के पीलर में कंटीला तार भी लगाया गया था लेकिन बाहरी जानवरों ने कई जगहों पर गिरा दिया था ।
एक पेड़ का तना कुछ बदसूरत नज़र आ रहा था । मैने मित्र को साथ में लिया और बाऊंडरी की ओर बढा करीब पहुंचने पर हम दोनों ने देखा एक पेड़ के तने से लगभग पांच फिट ऊंचाई तक उसकी छाल किसी ने निकाल ली थी ।
बहुत दुख हुआ ऐसा लगा जैसे किसी ने जिस्म से खाल खींच ली हो। जैसे कब्र पर पड़ी चादर खीच ली हो । जैसे मुर्दे के ऊपर से कफन खींच लिया गया हो । बहुत देर तक खामोश मैं दुखी मन से देखता रहा , तभी मित्र ने कहा क्या सोंच रहे हैं ? मैने मित्र की ओर देखा और पूछा देख रहे हैं इस पेड़ की हाल? क्या कफन घसोट शायद ऐसे ही होते हैं ? मित्र कुछ न कह सके , ऐसा लगा जैसे वो भी दुखी थे ।

गुरुवार, 3 दिसंबर 2020

भले ही आप के धर्म से उसका धर्म अलग हो

मानव की उत्पत्ति मानव से ही हुई है । न कि किसी जानवर से । सृष्टि के सभी मानव एक ही मानव के वंसज हैं ।
आज विभिन्न समुदाय , विभिन्न धर्म , विभिन्न भेषभुसा , विभिन्न भाषाएं सब अलग अलग विचारधारा और वहां के परिवेश के मुताबिक हैं । आप के दो चार भाई या दो चार लड़के हैं तो वो एक विचार धारा के नहीं हैं । भले ही आप के शक्त नियमों का पालन करते हैं । ये तभी तक कर सकते हैं जब तक आप जीवित हैं । और सभी को एक साथ लेकर चलने की आप के अंदर एक मजबूत धारणा है । मगर जिस दिन आप इस दुनियां से चले जाएंगे उसके बाद सभी अपनी अपनी ख्वाहिशों के मुताबिक जीने के लिए आजाद हो जाएंगे । इस लिए न किसी को बुरा कहिए और न किसी के ऊपर कोई कमेंट करें ये उसकी जिंदगी है । वो भी इस दुनियां में अपनी ख़ुशी के मुताबिक जीने के लिए आया है । वो भी स्वतंत्रता पूर्वक न की दास प्रथा के युग में है । मानवता की नजर से देखोगे तो वो तुम्हारा कुछ न कुछ तो जरुर लगेगा भले ही आप के धर्म से उसका धर्म अलग हो ।

बुधवार, 2 दिसंबर 2020

सबसे बड़ा सवाल तो तुम खुद ही हो

दुनियां जबतक खत्म नहीं हो जाएगी तब तक सवाल बनते रहेंगे और उठते रहेंगे ।
क्यों कि सबसे बड़ा सवाल तो तुम खुद ही हो , जबतक तुम हो सवाल बनते रहेंगे जिस दिन जवाब बन क़र उठोगे उस दिन से कोई सवाल न पैदा होगा और न उठेगा । इस लिए सवालों के घनचक्कर से निकल जाओ और जवाब बन जाओ लोग अपना सवाल हल करने के लिए तुम्हें ढूँढना शुरु कर देंगे और तुम्हारे पीछे पीछे लगे रहेंगे । सवालों का कभी अंत नहीं होता लेकिन हजार सवाल पर एक जवाब ही भारी पड़ जाता है और सभी को खामोश भी कर देता है ।

सोमवार, 30 नवंबर 2020

मैं तुम्हें बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगा

जिंदादिली से मर जाना मैं बर्दाश्त कर लुंगा , लेकिन जिस दिन तुम्हारा ज़मीर मर गया , उस दिन मैं तुम्हें बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगा , उस दिन से तुम मेरे लिए ज़िंदा लाश की तरह ही नज़र आओगे ।

रविवार, 29 नवंबर 2020

पहचान की गहराई तक उतरना

पहचान हो जाना , पहचान बनाना और पहचान की गहराई तक उतरना ये तीन मामले हैं ।

1- पहचान हो जाना -
आप जिस जगह पर रहते हैं वहां हालात और जरूरतों के मुताबिक लोगों से पहचान हो जाती हैं जैसे -
किराने की दुकान वाले , शब्जी वाले , दूध वाले , चाय वाले पान वाले , मैडिकल स्टोर , वस्त्रालय वाले , फल वाले, जूता चप्पल के विक्रेता आदि इत्यादि ।

2- पहचान बनाना -
ये जान बुझ कर लोग करते हैं जिसमें 90% लोगों के अपने निजी स्वार्थ होते हैं । जहाँ जैसी जरुरत पड़ती है वैसे लोगों का इस्तेमाल करते है ।

3- पहचान की गहराई तक उतरना -
इसमें लोग अपने पहचान को आप के रिफरेंस से आप के ही बहुत करीबी लोगों तक पहुँच बनाना शुरू कर देते हैं । जिसे आप जान कर अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं ।
ऐसे लोग धोखेबाज़ और मक्कार होते हैं । अगर आप अपने करीबी लोगों से मिलवाकर पहचान कराते हैं तो ठीक है ।
लेकिन बिना आप के पहचान कराये अगर वो आप के करीबी लोगों से पहचान बढाना शुरू कर दिया है तो ये समझ लेना की आप को कभी भी किसी बड़ी मुश्किल में डाल सकता है और ऐसी मुसीबत में ऐसे लोग आप के बहुत करीबी लोगों को ही आप के अगेंस्ट गलत फहमी पैदा कर के खड़ा कर देगा । जिससे आप अपने ही लोगों के सामने कमजोर पड़ जाएंगे । आप हर किसी को न सफाई दे पाएंगे और न सभी को समझा पाएंगे और न तो सभी के दिलों से गलतफहमीयों को निकाल पाएंगे । सिर्फ़ एक अजनबी के पहचान को स्वयं बढा लेने के कारण। 
अगर अपनी इज्जत आबरु और खुद को बचाए रखना हो तो ऐसे लोगों से तुरन्त उसी वक़्त दूर हो जाएं जिस वक़्त वो अपने मरजी से आप के करीबी लोगों से अपनी पहचान को गहराई तक ले जाने लगे। 
तब ये भी समझ लेना की अब इसे आप के पहचान की बहुत जरुरत नहीं रही । अब वो आप से ज्यादा पावर तलाश रहा है , जो आप को भी डाऊन कर सके और उसका मक़सद हल हो सके और ये सब उन्हीं लोगों में तलाशेगा जो लोग भी आप के करीबी होंगे चाहे दोस्त हों या रिश्तेदार या आप के खानदान जो भी हों , मगर आप के करीबी ही होंगे ।

सुझाव - 
आप अपनी पहचान को अपने तक ही सीमित रक्खें अपने लोगों से परिचित कराने से पहले उसके बारे में खुद ही पूरी जानकारी प्राप्त करें घरेलु बैकग्राउंड भी जानें ये विस्तृत जानकारी आप खुद करें ऐसा न हो कि किसी से पूछे हों या किसी से सुने हों । पूछने और सुनने वाली जानकारी में अंतर होता है । खुद से चल कर ली गई जानकारी संतोष जनक होती है । आवश्यकता पड़ने पर आप उसके घर भी जा सकते हैं या किसी को भेज सकते हैं अथवा एमरजेंसी में सूचित भी कर सकते हैं ।

शनिवार, 28 नवंबर 2020

जो हुआ अच्छा ही हुआ

सब्र , संतोष , इंतज़ार इन शब्दों के मायने एक ही हैं ।
सब्र आप को परेशान कर सकता है लेकिन निराश नहीं ।
सब्र हजारों परेशानियों से बचाते हुए ऐसे मुकाम पर लाता है जिसकी आपने कभी कल्पना भी न की हो और आप स्वतः ही बोल उठते हैं कि जो हुआ अच्छा ही हुआ ।
जरुरी नहीं है कि किसी मजबुरी को सब्र का नाम दिया जाय
वास्तविक सब्र वह है कि जब आप सही या गलत जैसे भी हो अपने काम को करने में सछम हों मगर उसमें अपनी हिकमत और मनबढई का इस्तेमाल किये बिना ही आप सब्र करते हैं ।

गुरुवार, 26 नवंबर 2020

मैने आप के ऊपर भरोसा किया

अब आप अपनी मनगढंत या हकीकत जो भी सफाई मुझे देंगे उससे मेरा खोया हुआ कुछ भी नहीं लौट सकता । 
मैंने आप के ऊपर भरोसा किया वो भी आप से पूछ कर लेकिन आप की एक गलती ने मेरी जिंदगी के सारे सपनों को मिट्टी में मिला दिया । 

बुधवार, 25 नवंबर 2020

बाद में तुम्हें दुख होता है

मुझे मालूम है कि तुम मुझे बहुत चाहते हो , मानते हो , प्यार भी करते हो , जब भी कही जाते हो तो एक बार यह जरुर सोंचते हो कि अगर वो भी साथ होती तो कितना अच्छा होता ।
तुम जब कुछ भी खाते हो तो भी मेरी याद आती है ।
तुम जब कुछ भी खरीदते हो तो भी मेरी याद आती है ।
और जब मेरे लिए कुछ भी नहीं लाते हो तो मुझे सिर्फ आस्चर्य होता है । लेकिन बाद में तुम्हें दुख होता है ।

रविवार, 22 नवंबर 2020

मुझे आप के स्वर्ग की जरुरत नहीं है

तुम्हें लगता है कि मैं नर्क में हूं तो मैं अपने नर्क में ही खुश और संतुष्ट हूं । मुझे आप के स्वर्ग की जरुरत नहीं है  । लेकिन आप अपने स्वर्ग में रह कर दुखी और परेशान क्यूँ हैं ?

मंगलवार, 17 नवंबर 2020

4जी मोबाइल है

फोर जी मोबाइल है ।
फोर जी सिम कार्ड है ।
फोर जी टावर भी लगा हुआ है ।
वोल्टी और फोर जी नेटवर्क भी शो करता है ।
फोर जी नेटवर्क ज्यादातर दो या तीन प्वाईन्ट शो करता है ।
बहुत कम कभी कभी पांच प्वाईन्ट नेटवर्क शो करता है।
डाटा भी शो करता है मगर डाटा कनेक्शन इतना वीक होता है कि एक प्वाईन्ट पकडता है तो एक प्वाईन्ट छोड़ देता है ।
कभी कभी दोनों प्वाईन्ट छोड़ देता है ।
लगता है कि डाटा कनेक्शन की फ्रिकवेनशी खुद कम कर दी जाती है जिससे नेट यूज करना काफी मुश्किल होता है ।
इतना महंगा मोबाइल और सब कुछ फोर जी मगर बारह घंटे में आठ घंटा टू जी बना पड़ा रहता है ।
इसपर भी वाइस कालिंग के दौरान कभी इधर से आवाज साफ नही जाती तो कभी उधर से आवाज साफ नहीं आती कालिंग काट कर के पुनः लगाना पड़ता है कि शायद अब आवाज़ सही आने जाने लगेगी ।
अगर आप एक , डेढ या दो जीबी डाटा रोज पाने वाला रिचार्ज कराये हैं तो एक दिन का पुरा डाटा यूज ही नहीं हो पाता है । और कोई भी कंपनी वाला ये नहीं सोंचता कि हमारे कंपनी की सर्विस जब बहुत बेहतर नहीं है तो कम से कम डाटा तो छोड़ दें जब कनेक्टिविटी सही होगी तो लोग यूज कर लेंगे । डाटा यूज करने का समय तो अनलिमिटेड होना चाहिए । मैने ये सारी हाल ग्रामीण इलाकों की बताई है ।
शहरों की जो भी हाल हो यहां ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क को 3जी से 4जी में अपग्रेड किया गया है इसको मैने होते हुए नहीं देखा है सिर्फ मैसेज आया था तो उसमें पढ कर जाना है कुल मिलाकर अस्सी परसेंट लोग 2जी , 3जी और 4जी में उल्झे हुए हैं संतुष्ट वही लोग हैं जो टावर के करीब हैं ।