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बुधवार, 24 दिसंबर 2025

हर किसी से उम्मीदें जुड़ी होतीं हैं

बेसहारा अपने पराए ईश्वर सज्जन 
ज़िंदगी में वक्त कब कैसा आ जाय ,
यह कभी कोई नहीं जान पाता है ।
कभी अपनों से सहारा मिलता है ।
कभी ग़ैरों से भी सहारा मिलता है ।।
कभी , कभी जिंदगी को अकेले भी 
काटना पड़ जाता है ।

उस समय जब न अपनों का सहारा 
होता है , और न तो गैरों का सहारा 
होता है । वह वक्त जिस में न तो जी 
पाना आसान होता है और न तो मर
पाना आसान होता है ।

उसमें भी उम्मीदें जुड़ी होतीं हैं ।
हर किसी से ............।
और आंखें चुपचाप टकटकी बांधे ,
रास्ता निहारतीं रहतीं हैं ।
अपनी जरुरतों को पूरा करने वाले 
व्यक्ति का , वह कोई भी हो सकता है ।
अपने भी , पराए भी , ईश्वर के द्वारा 
भेजा गया कोई सज्जन भी........... ।
                      " जावेद गोरखपुरी "

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