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शनिवार, 4 अक्टूबर 2025

फ़सल कोई और काटेगा

भारत देश में जो धार्मिक युद्ध चल रहा है ।
यह भय , भूख , बीमारी , ग़रीबी और 
बेरोज़गारी में ,
दिन प्रतिदिन स्प्रीट का काम करती जा रही है ।
गृह युद्ध पचास प्रतिशत क्रास कर चुका है ।
मरता क्या नहीं करता , वह दिन दूर नहीं जब 
गृह युद्ध अपने पूरे चरम सीमा पर पहुंच जाएगा ।

ऐसी परिस्थितियों में दो ही कार्य हो सकते हैं ।
या तो सार्वजनिक रुप से भारत में तख्तापलट ।
या तो संपूर्ण भारत पर दो से तीन धार्मिक ,
समुदायों का एक छत्र राज स्थापित हो जाएगा ।
परिस्थितियां और हालात तुम पैदा कर चुके हो ,
लेकिन फ़सल कोई और काटेगा ।
                                    " जावेद गोरखपुरी "
                                    

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