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शुक्रवार, 28 नवंबर 2025

क्या हम सचमुच में जी रहे हैं ?

🤔 क्या हम सचमुच में जी रहे हैं ?
हम सब ज़िंदगी में भाग रहे हैं , बेहतर नौकरी , 
ज़्यादा पैसा , बड़ी चीज़ें और अपने सपनों को 
हासिल करने के चक्कर में , लेकिन 
इस भाग - दौड़ में , हम रुकना कब भूल गए 
यह सोचने का समय ही नहीं मिला ?

ज़रा सोचिए : -

हम कल की चिंता में इतने डूबे रहते हैं ,
कि आज को पूरी तरह जी नहीं पाते हैं ।
हम दूसरों को प्रभावित करने की कोशिश में 
अपनी असली खुशी को अनदेखा कर देते हैं ।
हम मोबाइल स्क्रीन पर इतनी ज़िंदगियाँ देखते हैं 
कि अपनी ख़ुद की ज़िंदगी जीना भूल जाते हैं ।
क्या हमने अपनी ज़िंदगी का रिमोट कंट्रोल किसी और के हाथों में सौंप दिया है ?

अभी , एक पल के लिए रुकिए । 
फ़ोन नीचे रखिए । बाहर देखिए । 
अपनी साँसों को महसूस कीजिए ।
जीना सिर्फ़ साँस लेना ही नहीं है , 
बल्कि उस पल को महसूस करना है ,
जो अभी ' आप के ' पास है ।
क्या आप सिर्फ़ मौजूद हैं , या जी रहे हैं ?

सवाल : -

आप अपनी ज़िंदगी के सबसे छोटे , लेकिन 
सबसे ख़ुशी भरे पल को कैसे परिभाषित करेंगे ?
#सोचविचार #जीवन #प्रेरणा #आज का पल #ज़िंदगी
                                   " जावेद गोरखपुरी "

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